
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में ‘गरीबों के निवाले’ पर डाका: कोटेदारों की मनमानी, अधिकारियों की चुप्पी!
ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल
- घटतौली और गुंडागर्दी: बस्ती में राशन माफियाओं के आगे नतमस्तक क्यों है प्रशासन?
- ‘भूख’ पर कोटेदार की ‘दबंगई’: बस्ती के निवाले पर संगठित लूट का खुलासा!
- बस्ती में राशन घोटाला: गरीबों के हिस्से का अनाज कहां बेच रहा कोटेदार?
- बस्ती में कोटेदार का ‘राज’: विरोध करने पर मारपीट, घटतौली जारी!
- जिले में राशन वितरण की शर्मनाक सच्चाई: 2 किलो कटौती और खुले बाजार में बिक रहा अनाज!
बस्ती: उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि ‘अंत्योदय’ और ‘पात्र गृहस्थी’ के तहत कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोएगा, लेकिन बस्ती जनपद में इन दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिले में राशन वितरण व्यवस्था एक संगठित लूट का अड्डा बन चुकी है, जहाँ कोटेदार न केवल घटतौली कर रहे हैं, बल्कि विरोध करने पर ग्रामीणों को धमकाकर अपनी दबंगई का परिचय भी दे रहे हैं।

निवाले में कटौती, बाजार में चांदी
ताजा मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के गोबरहिया और लोहरौली ग्राम पंचायत का है। गोबरहिया निवासी उमेश शुक्ल ने मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) पर शिकायत दर्ज कर प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। वहीं, लोहरौली के प्रसिद्ध कुमार ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी है कि ग्राम पंचायत के कोटेदार राज नारायण खुलेआम लूट मचाए हुए हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रत्येक राशन कार्ड धारक को सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से 2 किलो राशन कम दिया जा रहा है। सवाल यह है कि यह बचा हुआ हजारों किलो राशन आखिर जा कहाँ रहा है? सूत्रों की मानें तो कोटेदार इस सरकारी अनाज को सीधे खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर अपनी जेबें भर रहे हैं।
दबंगई ऐसी कि ‘कानून भी थर-थर’
हैरानी की बात तो यह है कि जब गरीब कार्ड धारक अपना हक मांगते हैं, तो कोटेदार राज नारायण और उनके गुर्गे अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। क्या बस्ती का राशन तंत्र गुंडों के हवाले है? क्या कोटेदार का काम गरीबों का पेट भरना है या उनके हिस्से के अनाज पर कुंडली मारकर बैठना?
शासन-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
ग्रामीणों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कोटेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
”हम अपना पूरा राशन चाहते हैं। कोटेदार की मनमानी अब बर्दाश्त के बाहर है। अगर शासन और जिला प्रशासन ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।” — ग्रामीणों का आक्रोश
अब देखना यह है कि क्या बस्ती का जिला प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस ‘राशन माफिया’ पर नकेल कसेगा, या फिर गरीब के निवाले पर जारी यह डकैती इसी तरह बदस्तूर जारी रहेगी?




















